नई दिल्ली: देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार टोल टैक्स से छूट पाने वाले वाहनों और विशेष श्रेणी के लोगों की संख्या कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में कई सरकारी अधिकारी और वीआईपी श्रेणी के लोग भी हाईवे पर यात्रा के दौरान टोल टैक्स का भुगतान करने के दायरे में आ सकते हैं।
टोल छूट की श्रेणियों में कटौती का प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि टोल छूट की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर इसे सीमित किया जाना चाहिए। प्रारंभिक स्तर पर सरकारी अधिकारियों से जुड़े वाहनों को मिलने वाली टोल छूट समाप्त करने पर विचार किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य टोल प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और आम नागरिकों तथा विशेष वर्गों के बीच मौजूद अंतर को कम करना बताया जा रहा है।
VIP कल्चर पर लग सकती है लगाम
सरकार की योजना हाईवे पर मुफ्त यात्रा की सुविधा को चरणबद्ध तरीके से सीमित करने की है। माना जा रहा है कि इससे सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच समानता का संदेश जाएगा और लंबे समय से चली आ रही वीआईपी संस्कृति को कम करने में मदद मिलेगी।
फास्टैग एनुअल पास को बढ़ावा देने की तैयारी
हाल ही में शुरू किए गए फास्टैग एनुअल पास को भी इस नई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। 3,075 रुपये की कीमत वाले इस पास के जरिए एक वाहन वर्षभर में 200 बार तक टोल प्लाजा पार कर सकता है। इस व्यवस्था के तहत प्रति यात्रा औसत टोल खर्च काफी कम हो जाता है।
सरकारी विभागों को सुझाव दिया गया है कि कर्मचारियों को टोल छूट देने के बजाय उनके वार्षिक फास्टैग पास का खर्च प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाए। इससे टोल संग्रह प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित तथा पारदर्शी हो सकती है।
वर्तमान में किन्हें मिलती है टोल से छूट?
मौजूदा नियमों के तहत 25 संवैधानिक और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के वाहनों को टोल शुल्क से छूट प्राप्त है। इसके अलावा सेना, अर्धसैनिक बलों, पुलिस, एंबुलेंस, अग्निशमन सेवा, अंतिम संस्कार वाहनों और राष्ट्रीय राजमार्ग निरीक्षण से जुड़े वाहनों को भी टोल टैक्स नहीं देना पड़ता।
हालांकि इन सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए भी विशेष छूट वाले फास्टैग का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
डिजिटल सिस्टम के बाद बढ़ी समीक्षा की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि फास्टैग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने के बाद टोल वसूली पहले की तुलना में काफी सरल और प्रभावी हो गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में दी जा रही छूटों की समीक्षा करना स्वाभाविक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल राजस्व संग्रह बढ़ सकता है, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होगी।
